श्री जिनसहस्रनाम - अर्घ्य
उदक-चंदन-तंदुल-पुष्पकैश्चरु-सुदीप-सुधूप-फलार्घ्यकैः
धवल-मंगल-गान-रवाकुले जिनगृहे जिननाममहं यजे ॥
धवल-मंगल-गान-रवाकुले जिनगृहे जिननाममहं यजे ॥
अन्वयार्थ : जल,
चन्दन, अक्षत्, पुष्प, नैवेद्य, दीप, धूप, फल व अर्घ्य से, धवल-मंगल गीतों
की ध्वनि से पूरित मंदिर जी में श्रीजिनेंद्र देव के 1008 गुण-नामों की
पूजा करता हूँ ।
ॐ ह्रीं श्रीभगवज्जिन अष्टाधिक सहस्रनामेभ्योऽर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा