परमेष्ठी कीर्तन (अरिहंत को नमन )

स्तोत्र आणि चालिसा · भजन
अरिहंत को नमन, अरिहंत को नमन, 
सिद्ध प्रभु को नमन, सिद्ध प्रभु को नमन ,
आचार्य को नमन, आचार्य को नमन, 
उपाध्याय को नमन, उपाध्याय को नमन।
सर्व साधु को नमन सर्व साधु को नमन, 
ये हैं मेरे पंच गुरु, इनको सदा नमन,
इनके नमन से हो मुक्ति पथ पे गमन, 
इनकी ही भक्ति में हो मेरे मन वच तन॥१॥

अरिहंत जय जय सिद्ध प्रभु जय जय,
साधु जन जय जय जिनधर्म जय जय।
अरिहंत मंगल सिद्ध प्रभु मंगल,
साधु जन मंगल जिनधर्म मंगल॥२॥

अरिहंत उत्तम सिद्ध प्रभु उत्तम,
साधु जन उत्तम जिनधर्म उत्तम।
अरिहंत शरणा सिद्ध प्रभु शरणा,
साधु जन शरणा जिनधर्म शरणा॥३॥

चार शरण अघ-हरण जगत् में और न शरणा हितकारी,
जो जन ग्रहण करें वे होते, अजर-अमर पद के धारी।
नमस्कार श्री अरिहंतों को, सिद्धि-प्रदाता सिद्धों को,
आचार्यों को उपाध्यायों को, सर्व लोक के संतों को॥४॥
🏠मुख्य पान📿जिनवाणी⛰️तीर्थक्षेत्र📖आगम🧘तत्त्वज्ञान