अरहनाथ
भगवान अरहनाथ हे देखील एकाच जन्मात तीर्थंकर, चक्रवर्ती (७ वे) आणि कामदेव (१४ वे) या तिन्ही उच्च पदव्या धारण करणारे महापुरुष होते.
संक्षिप्त जीवन परिचय व शारीरिक वैशिष्ट्ये
- माता-पिता: वडिलांचे नाव राजा सुदर्शन आणि आईचे नाव राणी मित्रादेवी (महादेवी).
- जन्म स्थान: हस्तिनापूर नगरी.
- जन्म तिथी: मार्गशीर्ष शुक्ल १०.
- चिन्ह (लांच्छन): मत्स्य (मासा) किंवा नद्यावर्त (विशेष स्वस्तिक/कमळाची रचना).
- शरीराचा रंग (वर्ण): तप्त कांचन वर्ण (तपकिरी-सुवर्ण).
- उंची: ३० हात (अंदाजे ४५ फूट).
- आयुष्य: ८४,००० वर्षे.
- दीक्षा: मार्गशीर्ष शुक्ल १० च्या दिवशी हस्तिनापूर येथे त्यांनी दिगंबर मुनी दीक्षा घेतली.
- केवलज्ञान: ३ वर्षे कठोर तपश्चर्या केल्यानंतर हस्तिनापुरातील आंब्याच्या वृक्षाखाली (आम्र वृक्ष) कार्तिक शुक्ल १२ ला त्यांना केवलज्ञान प्राप्त झाले.
- त्यांच्या समवशरणात ३० गणधर होते (प्रमुख गणधर: कुंभ स्वामी).
- मोक्ष (निर्वाण): मार्गशीर्ष शुक्ल १० च्या दिवशी सम्मेद शिखरजी येथील 'सिद्ध कुट' वरून भगवान अरहनाथ स्वामींना मोक्ष प्राप्त झाला.
पंच कल्याणक
| कल्याणक | स्थान | तिथी |
|---|---|---|
| गर्भ कल्याणक | हस्तिनापूर (उत्तर प्रदेश) | — |
| जन्म कल्याणक | हस्तिनापूर (उत्तर प्रदेश) | मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी |
| दीक्षा (तप) कल्याणक | हस्तिनापूर (उत्तर प्रदेश) | — |
| केवलज्ञान कल्याणक | हस्तिनापूर (उत्तर प्रदेश) | — |
| मोक्ष कल्याणक | श्री सम्मेद शिखरजी (झारखंड) | माघ शुक्ल दशमी |